Sampadkiya

  • Feb 25 2020 12:38AM
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दौरे के मायने

 अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारत दौरे के पहले दिन अहमदाबाद में प्रधानमंत्री मोदी के साथ उनका एक जनसभा को संबोधित करना लोक कूटनीति के लिहाज से एक शानदार अवसर रहा. राष्ट्रप्रमुखों की यात्रा में ऐसे आयोजन बहुत कम होते हैं. इसे पिछले साल अमेरिकी शहर ह्यूस्टन में हुई प्रधानमंत्री मोदी की रैली में राष्ट्रपति ट्रंप की शिरकत के बरक्स देखा जा सकता है, लेकिन दोनों जनसभाओं को भारत के प्रति अमेरिकी नेतृत्व और राजनीति के नजरिये में बदलाव के रूप में भी देखा जाना चाहिए. यह भी संकेत मिलता है कि बीते दशकों में दोनों देशों के बीच एक-दूसरे के महत्व को समझने की प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है. 

 
अमेरिका उन देशों में हैं, जिसके साथ भारत का व्यापार संतुलन सकारात्मक है यानी आयात की तुलना में हमारा निर्यात अधिक है. राष्ट्रपति ट्रंप अमेरिकी अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए संरक्षणात्मक नीति पर चल रहे हैं और उन्होंने भारत को मिलीं अनेक व्यापारिक छूटों को निरस्त भी किया है. 
 
वे शिकायत भी करते रहते हैं कि व्यापारिक असंतुलन को पाटने में भारत का रुख संतोषजनक नहीं है. इस मामले में बात नहीं बन पाने के कारण ही इस दौरे में किसी ठोस व्यापार समझौते की गुंजाइश नहीं है. संभवतः हथियारों की खरीद पर कुछ खास घोषणाएं हो सकती हैं. चीन, ईरान, रूस और अफगानिस्तान से जुड़े मसलों पर भी दोनों देशों में मतभेद हैं. 
 
पर, यह भी रेखांकित किया जाना चाहिए कि ट्रंप प्रशासन ने आतंकवाद के मुद्दे पर हमेशा भारत का पक्ष लिया है तथा हिंद-प्रशांत क्षेत्र में उसकी रणनीतिक भूमिका को भी समुचित महत्व दिया है. अमेरिका एक महाशक्ति है, तो भारत भी उभरती अर्थव्यवस्थाओं में विशेष स्थान रखता है तथा वैश्विक मंच पर अपनी भूमिका के विस्तार का आकांक्षी है. 
 
ऐसे में अनेक मामलों में सहकार की संभावना भी है और कुछ विषयों पर तकरार भी हो सकता है. समझौतों को लेकर राष्ट्रपति ट्रंप के रुख की अनिश्चितता भी जगजाहिर है. ऐसे में इस दौरे को या किसी महत्वपूर्ण देश के राष्ट्राध्यक्ष या शासनाध्यक्ष की यात्रा को केवल समझौतों व घोषणाओं के हिसाब से परखना ठीक नहीं होगा. 
 
यह कहा जा सकता है कि शायद राष्ट्रपति ट्रंप इस यात्रा के माध्यम से नवंबर के राष्ट्रपति चुनाव में भारतीय अमेरिकियों को रिझाना चाहते हैं, पर इसे एक बड़ा कारण मानना भी ऐसे दौरों के महत्व को सीमित करना है. पिछले दो राष्ट्रपति- जॉर्ज डब्ल्यू बुश और बराक ओबामा- भी भारत आये थे. 
 
इसी प्रकार से अनेक नेताओं का दौरा होता रहा है और प्रधानमंत्री मोदी ने भी कई देशों की यात्रा की है. इस तरह के दौरे या शिखर सम्मेलनों से निकटता को प्रगाढ़ करने और शिकायतों को दूर करने का अवसर मिलता है. इससे समझौतों का भी आधार बनता है तथा कूटनीति को भी लाभ पहुंचता है. इस पृष्ठभूमि में राष्ट्रपति ट्रंप की दो-दिवसीय यात्रा भारत-अमेरिकी संबंधों के इतिहास में महत्वपूर्ण अध्याय है.          
 

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